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22॰ परिशिष्ट

22॰ परिशिष्ट साक्षात्कारभारतीय ज्ञानपीठ व पद्मविभूषण से सम्मानित कवि सीताकान्त महापात्र से डॉ.प्रसन्न कुमार बराल द्वारा ओड़िया भाषा में लिए गए साक्षात्कार का हिन्दी अनुवाद जीवन-परिचय:- 1953 से 2015 के अंतराल के भीतर कितने वर्ष गुजर गए,पता ही नहीं चला। माहांगा के कुशीदा गाँव से रेवेन्सा, वहाँ से इलाहाबाद और उसके बाद कितने ही देश-विदेशों का भ्रमण। कहने की आवश्यकता नहीं कि अपने जीवन काल में कितने राष्ट्रों का उन्होंने भ्रमण किया होगा। यही वजह है कि ओड़िया रामायण, महाभारत, भागवत, तपस्विनी जैसे ग्रन्थों को पढ़ने, सुनने और अध्ययन करने की साहित्यिक जिज्ञासा देश-देशांतर के कोने-कोने में व्याप्त होने लगी। विश्व के सबसे ज्यादा चर्चित, समृद्ध भाषा एवं साहित्य वाले देश ओड़िया अक्षरों के प्रति आकर्षित हुए, ओड़िया भाषा के एक-एक शब्दों के प्रति। ओड़िया  भाषा की कविताओं को उन्होंने बिना पासपोर्ट और वीसा दिलवाए ही समग्र विश्व का भ्रमण करवा दिया। यह वे कवि हैं, जो नन्द किशोर बल नहीं हैं, जिन्होंने ‘छोटा मेरा गाँव’ की तरह कविता भले ही नहीं लिखी हो,फिर भी उनकी कविताओं में विशेषकर गाँव तथा पल्ली का आकर्षक चित्रण…